अकबर और कुंभनदास जी की प्रसिद्ध कथा
अकबर और कुंभनदास जी की प्रसिद्ध कथा कुंभनदास जी की भक्ति और भजनों की प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। उनकी ख्याति मुगल सम्राट अकबर तक भी पहुँच गई। अकबर कला और संतों का सम्मान करता था। उसने कुंभनदास जी को अपने दरबार में बुलाने का आदेश दिया। पहले तो कुंभनदास जी जाने के लिए तैयार नहीं हुए। उन्हें राजदरबार और वैभव में कोई रुचि नहीं थी। लेकिन बार-बार आग्रह करने पर वे दरबार पहुँचे। दरबार में पहुँचकर उन्होंने देखा कि लोग धन, शक्ति और पद के पीछे भाग रहे हैं। उनका मन वहाँ बिल्कुल नहीं लगा। तब उन्होंने प्रसिद्ध पंक्ति कही: “संतन को कहा सीकरी सो काम” यह पंक्ति बहुत प्रसिद्ध हुई। इसका अर्थ था कि संतों का राजमहलों और सांसारिक वैभव से कोई संबंध नहीं होना चाहिए। अकबर उनकी बात सुनकर प्रभावित हुआ। उसने उनकी भक्ति और सादगी का सम्मान किया। भजन और साहित्य कुंभनदास जी ने ब्रज भाषा में अनेक भक्ति पदों की रचना की। उनके भजनों में: भगवान कृष्ण की बाल लीलाएँ गोपियों का प्रेम वृंदावन की महिमा और भक्तों का समर्पण का सुंदर वर्णन मिलता है। उनके भजन सरल भाषा में होते थे ताकि सामान्य लोग भी उन्हें आसानी से समझ सकें।...