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नंदगांव: भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का पावन स्थल

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  नंदगांव: भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का पावन स्थल मथुरा (उत्तर प्रदेश): ब्रजभूमि का हर कोना श्रीकृष्ण की लीलाओं से पवित्र है, और इसी ब्रज की गोद में बसा है नंदगांव — वह स्थल जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपना बचपन बिताया। यह गांव श्रीकृष्ण के पालक पिता नंद बाबा का निवास स्थान माना जाता है। यही से श्रीकृष्ण ने अपनी अनेक लीलाएँ कीं — गोवर्धन पूजा, गोचारण, और राधा रानी से प्रथम मिलन की कथाएँ यहीं से जुड़ी हैं। नंदगांव, मथुरा जिले में स्थित है और यह बरसाना से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान भक्तों और पर्यटकों दोनों के लिए समान रूप से आस्था का केंद्र है। 🔹 नंदगांव का धार्मिक महत्व नंदगांव का उल्लेख अनेक पुराणों और ग्रंथों में मिलता है। जब श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में हुआ था, तो वासुदेव जी ने उन्हें रातों-रात यमुना पार कर गोकुल पहुंचाया था। गोकुल में कुछ वर्षों तक रहने के बाद, जब कंस के अत्याचार बढ़ने लगे, तब नंद बाबा ने अपने परिवार के साथ गोकुल से नंदगांव का रुख किया। यहीं श्रीकृष्ण ने अपने बड़े भाई बलराम जी के साथ बाल लीलाएँ की...

संत जानाबाई — भक्ति, सेवा और विनम्रता की प्रतिमूर्ति

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  संत जानाबाई — भक्ति, सेवा और विनम्रता की प्रतिमूर्ति संक्षेप में: संत जानाबाई मराठी भक्ति परंपरा की महान कवयित्री और विठोबा की अनन्य भक्त थीं। उनका जीवन सेवा, श्रम और ईश्वर प्रेम का सच्चा प्रतीक है। उन्होंने दिखाया कि सच्ची भक्ति का अर्थ कर्म और विनम्रता में है। 1️⃣ प्रारंभिक जीवन संत जानाबाई का जन्म लगभग 1270 ईस्वी में महाराष्ट्र के गंगाखेड़ (जिला परभणी) में हुआ। बचपन से ही वे अत्यंत भक्ति-भाव से युक्त थीं। माता-पिता के देहांत के बाद उन्होंने संत नामदेव के घर में सेवा की। वहीं से उनके जीवन में विठोबा के प्रति प्रेम और समर्पण का आरंभ हुआ। 2️⃣ नामदेव और जानाबाई का संबंध संत जानाबाई, नामदेव महाराज के घर में सेवा करती थीं, परंतु वे उनके लिए मात्र एक दासी नहीं थीं — वे “भक्ति की सखी” थीं। उन्होंने कहा था — “मी दासी नाही, मी विठोबाची सखी आहे।” (“मैं दासी नहीं, विठोबा की सखी हूँ।”) 3️⃣ विठोबा भक्ति और साधना जानाबाई ने जीवन का हर क्षण विठोबा की सेवा में लगाया। वे काम को ही पूजा मानती थीं। उनका मानना था कि — “सेवा ही साधना है, श्रम ही भक्ति है।” उन्होंने...

बरसाना: राधा रानी की जन्मभूमि — इतिहास, दर्शन स्थल और आध्यात्मिक महत्व

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बरसाना: राधा रानी की जन्मभूमि — इतिहास, दर्शन स्थल और आध्यात्मिक महत्व संक्षेप में: बरसाना, मथुरा ज़िले में स्थित एक पवित्र स्थल है जहाँ राधा रानी का जन्म हुआ था। यह स्थान भक्ति, प्रेम और संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। यहाँ का हर कोना राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। 1️⃣ बरसाना का परिचय बरसाना उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में स्थित है। यह ब्रजभूमि का एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान है। यहाँ चार प्रमुख पहाड़ियाँ हैं — विलासगिरि, मोरकुट, दानगढ़ और मानगढ़। इन्हें राधा रानी के चार सखाओं का प्रतीक माना जाता है। 2️⃣ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बरसाना को “राधा नगरी” कहा जाता है। मान्यता है कि यहाँ राधा रानी का जन्म वृषभानु जी और किरतनिधि देवी के घर हुआ था। यह स्थान ब्रज संस्कृति और श्रीकृष्ण भक्ति का जीवंत केंद्र है। 3️⃣ बरसाना के प्रमुख दर्शनीय स्थल श्री राधा रानी मंदिर (लाड़ली जी मंदिर): यह मंदिर मानगढ़ पहाड़ी पर स्थित है और बरसाना का सबसे प्रसिद्ध स्थान है। कृष्ण कुंड: जहाँ राधा और कृष्ण की बाल लीलाएँ हुईं। दानगढ़: जहाँ श्रीकृष्ण ने राधा-सखियों से दान माँगा था। मान...

गोवर्धन पर्वत — श्रीकृष्ण की लीला, धार्मिक महत्त्व, परिक्रमा और पूरा मार्गदर्शन

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गोवर्धन पर्वत — श्रीकृष्ण की लीला, धार्मिक महत्त्व, परिक्रमा और पूरा मार्गदर्शन संक्षेप में: गोवर्धन (Govardhan) वृंदावन के निकट स्थित एक पवित्र पर्वत है, जो श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध गोवर्धन लीला के कारण प्रतिष्ठित है। यह लेख गोवर्धन का ऐतिहासिक, धार्मिक और भौगोलिक परिचय, परिक्रमा का महत्व, प्रमुख तीर्थस्थल, उत्सव और तीर्थयात्रियों के लिए व्यावहारिक सुझाव विस्तार से प्रस्तुत करता है। 1) गोवर्धन — संक्षिप्त परिचय और भौगोलिक स्थिति गोवर्धन (Govardhan) उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में वृंदावन के समीप स्थित एक पवित्र पर्वतीय क्षेत्र है। परिक्रमा मार्ग लगभग 21–24 किलोमीटर माना जाता है—जिसे श्रद्धालु पैदल या चरणबद्ध रूप में करते हैं। आसपास कई मंदिर, आश्रम और तीर्थस्थल हैं। भौगोलिक विशेषताएँ परिक्रमा की लंबाई लगभग 21–24 किमी (स्थानीय माप अनुसार)। पर्यावरण चट्टानी टेक्सचर, छोटे जलाशय और तीर्थ-स्थल से भरा है। 2) पौराणिक कथा — श्रीकृष्ण और गोव र्धन लीला गोवर्धन की सबसे प्रसिद्ध कथा वह है जिसमें बाल-लिला के समय श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर...

वंशीवट वृंदावन — जहाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी की धुन में प्रेम, भक्ति और आत्मा का मिलन होता है

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  🌸 वंशीवट वृंदावन — जहाँ श्रीकृष्ण की बाँसुरी की धुन में प्रेम, भक्ति और आत्मा का मिलन होता है 🌸 वृंदावन — भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, रासलीला, प्रेम और भक्ति का जीवंत केंद्र है। यह वही भूमि है जहाँ हर कण में कृष्ण की महिमा बसती है। वृंदावन की सुंदरता और पवित्रता का हृदय है — वंशीवट । यह वही स्थान है जहाँ श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य वंशी (बाँसुरी) बजाकर सम्पूर्ण ब्रजमंडल को प्रेमरस में डुबो दिया था। कहा जाता है कि इस बाँसुरी की धुन में भक्ति, त्याग और आत्मा-परमात्मा का मिलन छिपा हुआ है। हर भक्त के लिए वंशीवट एक भावनात्मक अनुभव है — जहाँ आने से मन, तन और आत्मा तीनों ही शुद्ध हो जाते हैं। 🌿 वंशीवट का अर्थ और नाम की उत्पत्ति “वंशीवट” शब्द दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है — वंशी (बाँसुरी) और वट (बड़ का वृक्ष)। इसलिए “वंशीवट” का शाब्दिक अर्थ हुआ — “वह स्थान जहाँ श्रीकृष्ण बाँसुरी बजाया करते थे।” पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, वंशीवट वृंदावन का सबसे प्राचीन और दिव्य स्थल है। यहाँ आज भी वही पुराना वट वृक्ष मौजूद है, जिसके नीचे श्रीकृष्ण ने गो...

श्री राधारमन जी महाराज श्री धाम वृंदावन

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श्री राधा-रमण जी महाराज — जीवन, लीला, मंदिर और भक्ति मार्ग का पूरा विवरण श्री राधा-रमण जी महाराज — जीवन, लीला, मंदिर और भक्ति मार्ग का पूरा विवरण संक्षेप में: श्री राधा-रमण जी महाराज वृंदावन की प्राचीन और प्रमुख देव-प्रतिमाओं में से एक हैं। इस लेख में हम उनके प्रकट होने का वृत्तांत, मंदिर का इतिहास, पूजा-विधि, हरिदास/गोस्वामी परंपरा से संबंध, प्रमुख त्यौहार, भक्तजन के अनुभव और उनके आध्यात्मिक संदेश का विस्तार से वर्णन करेंगे। यह लेख WordPress के लिए तैयार HTML फॉर्मेट में है — आप सीधे पेस्ट कर सकते हैं। 1) श्री राधा-रमण कौन हैं? — परिचय श्री राधा-रमण शब्द से वृंदावन में स्थापित विशिष्ट दिव्य प्रतिमा/देवता का उल्लेख होता है, जिनमें राधा और कृष्ण दोनों रूपों की महिमा समाहित है। पारंपरिक वैष्णव परम्परा में, राधा (प्रेम-आत्मिक शक्ति) और रमण (विलासिनी/कृष्ण के प्रेमी) का संयुक्त आदर होता है—यही भाव राधा-रमण नाम में निहित है। राधा-रमण की मूर्ति का स्वरूप, इतिहास और पूजा-विधान अलग-अलग स्थानों पर विविधता रखता है, लेकिन सभी में प्रेम-भक्ति का केंद्र...

वृंदावन और मथुरा के दर्शनीय मंदिरों की सूची

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    "वृंदावन और मथुरा के दर्शनीय मंदिरों की सूची"

देवी राधा के 108 नाम और उनके अर्थ

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  देवी राधा के 108 नाम और उनके अर्थ राधा - भक्ति की सर्वोच्च देवी वृन्दावनेश्वरी - वृन्दावन की रानी गोपिका - प्रिय चरवाहा लड़की कृष्ण प्रिया - भगवान कृष्ण की प्रिय मुक्तिका - मुक्ति प्रदान करने वाली गोलोक वृंदा - गोलोक की अधिष्ठात्री (कृष्ण का निवास) राधिका- आदरणीय वृषभानुजा - राजा वृषभानु की पुत्री ब्रजेश्वरी-ब्रज की रानी गोपेश्वरी - गोपों की रानी (चरवाहे लड़के) राधेश्वरी - राधा की देवी गोपिका प्रिया - प्रिय गोपिका श्यामा - साँवले रंग की सुन्दरी प्रेमलता - दिव्य प्रेम की लता गोविंदा आनंदिनी - भगवान गोविंदा की प्रसन्नता वृन्दावन सुन्दरी - वृन्दावन की सुन्दरता नंदिनी - नंद की बेटी (कृष्ण के पिता) गोविंदा कांता - भगवान गोविंदा के प्रेमी मृदुला - सौम्य और दयालु गोपीश्वर - गोपियों की रानी (ग्वालियाँ) वृषभानु तनया - राजा वृषभानु की पुत्री यशोदा नंदिनी - माता यशोदा की पुत्री व्रजेश्वरी - व्रज की देवी (कृष्ण का निवास) रासेश्वरी - दिव्य प्रेम की रानी युगलप्रिया - दिव्य युगल (राधा-कृष्ण) के प्रेमी किशोरी - युवा युवती रति प्रिया - कामुक इच्छाओं की प्रिय वृन्दावनेश्वरी - वृन्दावन की शासक प्रि...

वृन्दावन

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  वृन्दावन   भारत  के  उत्तर प्रदेश  राज्य के  मथुरा ज़िले  में स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक व ऐतिहासिक नगर है।  वृन्दावन भगवान  श्रीकृष्ण  की लीला से जुडा हुआ है। यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। यहाँ विशाल संख्या में श्री कृष्ण और राधा रानी के मन्दिर हैं । बांके विहारी जी का मंदिर, श्री गरुड़ गोविंद जी का मंदिर व राधावल्लभ लाल जी का, ठा.श्री पर्यावरण बिहारी जी का मंदिर बड़े प्राचीन हैं । इसके अतिरिक्त यहाँ श्री राधारमण, श्री राधा दामोदर, राधा श्याम सुंदर, गोपीनाथ, गोकुलेश, श्री कृष्ण बलराम मन्दिर, पागलबाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर,  प्रेम मंदिर , श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर, अक्षय पात्र, वैष्णो देवी मंदिर। निधि वन ,श्री रामबाग मन्दिर आदि भी दर्शनीय स्थान है। प्राचीन वृन्दावन कहते है कि वर्तमान वृन्दावन असली या प्राचीन वृन्दावन नहीं है। श्रीमद्भागवत के वर्णन तथा अन्य उल्लेखों से जान पड़ता है कि प्राचीन वृन्दावन तो गोवर्धन के निकट कहीं था। यह तब गोवर्धन-धारण की प्रसिद्ध कथा की स्थली वृन्दावन पार...

Biraj Chaurasi Kos Yatra

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Biraj Chaurasi Kos Yatra – Full Detail ∆   Length: approx 84 kos (252 km) ∆  Location: Mathura, Vrindavan               aur  aas-paas ka Brij Mandal ∆    Duration: 15 days se 1 month tak       (agar yatra paidal ki jaye to) 🛕  Main Places (Pramukh Dham) 1. Vrindavan Shri Krishna ki raas aur baal leela ki nagri. Famous temples: Banke Bihari Mandir  ,Radha Raman Mandir, ISKCON ,Prem Mandir,  राधावल्लभ मंदिर  रंजी मंदिर मदन मोहन जी मंदिर गोपीनाथ जी मंदिर वृंदावन के यह सात प्रमुख मंदिर है   2. गोवर्धन पर्वत यह वह पर्वत है जो भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र का घमंड तोड़ने के लिए अपनी उंगली पर उठाया था  गोवर्धन पर्वत की 21 किलोमीटर की परिक्रमा है जो की बहुत ही स्पेशल मानी गई हैं   गोवर्धन पर्वत की बहुत ही मानता है    3. बरसाना  बरसाना श्री राधा रानी की जन्म भूमि है  और यहां श्री लाडली जी महाराज का मंदिर भी है यहां की फेमस रंगीली गालियां और लाडल...

Rinku Rajput veermahan

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               Rinku Rajput veermahan 01.Shuruaati Jeevan Janm: 8 August 1988, Uttar Pradesh, India Rinku Singh ek chhote gaon se taluq rakhte hain. Pehle wo ek javelin thrower (bhala phenk khiladi the 02.Baseball Career 2008 me unhone ek reality show “The Million Dollar Arm” jeeta tha  Ye ek competition tha jisme India ke ladko ko baseball pitching talent dhoondhne ke liye bulaya gaya tha  Rinku Singh ne fast pitching me sabko hara kar USA me contract jeeta  Unhe Pittsburgh Pirates (Major League Baseball team) ne sign kiya  Is tarah se Rinku Singh India ke pehle professional baseball player bane jo USA me khelenge  the. 🤼 WWE Career 2018 me Rinku Singh ne WWE join kiya aur training shuru ki  Unka ring name bana “Veer Mahaan  WWE Raw aur NXT shows me unhone fight ki aur apni strong body + Rajput warrior persona se logon ko impress kiya. 🏆 Achievements Pehle Indian jinhone USA ki Major League Baseball team ke li...

देवरहा बाबा: एक रहस्यमयी सिद्ध पुरुष

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          देवरहा बाबा: एक रहस्यमयी सिद्ध पुरुष 01. परिचय और जीवन देवरहा बाबा उत्तर प्रदेश के देवरिया ज़िले से संबंध रखते थे। उनका जन्म-स्थान और जन्म-तिथि का कोई विश्वसनीय रिकॉर्ड नहीं है, और उनकी उम्र को लेकर बातें भी अलग-अलग हैं — कुछ मानते थे उन्होंने 250 साल, तो कुछ मानते थे 500–900 साल तक जिया । वह उत्तर प्रदेश के देवरिया से करीब सलेमपुर तहसील स्थित “मइल” और सरयू नदी के किनारे रहने लगे, और इसी वजह से उन्हें देवरहा बाबा कहा जाने लगा । 02. रहन-सहन और साधना देवरहा बाबा का जीवन बिल्कुल साधारण और सन्यासी थ वे मचान (लकड़ी का ऊँचा मंच) पर रहते थे और सिर्फ सुबह ही नदी में स्नान करने नीचे आते थे। उनके शरीर पर केवल मृग-छाला की ओढ़नी होती थी और उनके सामने लकड़ी की पट्टी होती जिससे उनकी अर्ध-नग्नता छुपी रहती थी । उनका भोजन भी असाधारण था — कहा जाता है उन्होंने कभी कुछ नहीं खाया, सिर्फ दूध, शहद, या श्रीफल का रस ग्रहण किया करते थे । 03. आध्यात्मिक शक्तियाँ और चमत्कार देवरहा बाबा को “Ageless Yogi” कहा जाता था क्योंकि माना जाता है कि उन्होंने लंबे समय तक अपनी मृत्यु को नियंत...

कुंज और निकुंज का आध्यात्मिक रहस्य

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      कुंज और निकुंज: वृन्दावन के दिव्य उद्यान  1. भूमिका – वृन्दावन का दिव्य महत्वf वृन्दावन धरा पर ऐसा पवित्र स्थान है, जहाँ प्रत्येक कण राधा-कृष्ण के प्रेम का साक्षात स्वरूप प्रतीत होता है। इसे केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं माना जा सकता, बल्कि यह स्वयं दिव्यता का प्रकट रूप है। ब्रजभूमि के कण-कण में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, यौवन लीलाओं और रास लीलाओं की गूंज सुनाई देती है। वृन्दावन के निकुंज, उपवन और वनों में आज भी वह आभास होता है मानो राधा-कृष्ण किसी लता के पीछे छिपकर विहार कर रहे हों  वृन्दावन के कुंज और निकुंज केवल बगीचे नहीं हैं, बल्कि ये साधना स्थल हैं जहाँ मनुष्य अपनी आत्मा को भगवान के साथ जोड़ सकता है। 2. कुंज और निकुंज का शाब्दिक अर्थ (क) कुंज संस्कृत और हिन्दी साहित्य में “कुंज” शब्द का अर्थ है – घने वृक्षों, लताओं और फूलों से ढका हुआ उद्यान। यह ऐसा स्थान होता है जहाँ छाया, शीतलता और सौंदर्य एक साथ मिलते हैं। कुंज केवल बगीचा नहीं होता, यह आश्रय स्थल और आनंद स्थल भी है। भगवान श्रीकृष्ण को “कुंजबिहारी” कहा जाता है। इसका अर्थ है – वह जो...

श्री राधावल्लभ लाल जी श्री धाम वृंदावन

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श्री राधावल्लभ लाल जी  भगवान श्रीकृष्ण और देवी राधा का संयुक्त स्वरूप हैं, जो दो शरीरों में एक आत्मा के रूप में विराजमान हैं और भगवान शिव के हृदय से उत्पन्न हुए हैं ।  श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने इन्हें वृंदावन में स्थापित किया था और यह श्री राधावल्लभ संप्रदाय के प्रमुख देवता हैं।  यह विग्रह अपनी अनोखी प्रतिमा के लिए जाना जाता है, जिसमें आधे भाग में श्री राधा और आधे में श्री कृष्ण का स्वरूप दिखाई देता    राधावल्लभ सम्प्रदाय का आरंभ इस सम्प्रदाय की स्थापना हिट हरिवंश महाप्रभु जी (जन्म : संवत् 1530, स्थान – बृज के बड़ गाँव, जिला – मथुरा) ने की थी। वे स्वयं राधारानी के प्रकट रूप माने जाते हैं और उन्हें "राधावल्लभ जी महाराज" कहा जाता है।   राधावल्लभ लाल जी कौन हैं? 👉 यहाँ भ्रम होता है। दरअसल – राधावल्लभ जी कोई मनुष्य नहीं बल्कि श्री राधावल्लभ लाल जी श्रीविग्रह (देव स्वरूप) हैं।  यह विग्रह स्वयं प्रकट हुआ स्वरूप है, जिसे आज वृन्दावन के प्रसिद्ध श्री राधावल्लभ मंदिर में विराजमान किया गया है। श्री राधावल्लभ लाल जी 1. श्री राधावल्लभ ल...

संत अच्युतानंद जी महाराज : ओड़िशा के भविष्यवक्ता संत और पंचसखा परंपरा के महामानव

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  संत अच्युतानंद जी महाराज : ओड़िशा के भविष्यवक्ता संत और पंचसखा परंपरा के महामानव 1. प्रस्तावना भारत की संत परंपरा का इतिहास अत्यंत समृद्ध है। भक्ति आंदोलन के दौर में अनेक संतों ने समाज को ईश्वर भक्ति, समानता और सेवा का संदेश दिया। इसी परंपरा में ओड़िशा के महान संत संत अच्युतानंद जी महाराज का नाम सदैव अमर रहेगा। वे केवल संत ही नहीं, बल्कि कवि, दार्शनिक और भविष्यवक्ता भी थ 2. जन्म और बाल्यकाल संत अच्युतानंद जी का जन्म 16वीं शताब्दी में ओड़िशा के पुरी जिले में हुआ। उनके माता-पिता सामान्य ग्रामीण जीवन जीने वाले धर्मपरायण दंपत्ति थे। बचपन से ही उनमें अलौकिक लक्षण दिखने लगे। वे साधारण बच्चों की तरह खेलने के बजाय अक्सर ध्यान में लीन रहते। 3. गुरु और शिक्षा संत अच्युतानंद जी को आध्यात्मिक मार्गदर्शन श्री चैतन्य महाप्रभु से प्राप्त हुआ। चैतन्य महाप्रभु ने उन्हें प्रेममार्ग, संकीर्तन और राधा-कृष्ण भक्ति का गूढ़ ज्ञान दिया। गुरु के आशीर्वाद से वे शीघ्र ही भक्ति आंदोलन के प्रमुख स्तंभ बन गए। 4. पंचसखा परंपरा अच्युतानंद जी "पंचसखा" नामक संत मंडली के एक सदस्य थे। पंचसखा संतों के नाम 1. ज...